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फेय्न्मन तकनीक चीजों को याद करने में सहायक

फेय्न्मन तकनीक उनके लिए याद करने का उत्तम तरीका हैं जिन्हें याद करना उबाऊ लगता है ।

सभी लोग हमेशा यह चाहते हैं कि बिना याद किए ही सब कुछ याद रहे ।

यूँ तो हम सभी ने अपने बड़ों से सुना होगा कि सुबह चार बजे पढ़ने से पढ़ी हुई चीजें कभी भूली नहीं जाती ।

बादाम खाने से याद करने की क्षमता बढ़ती है ।

कई लोगों को याद करना या रट्टा मारने में काफी कठिनाई होती है ।

याद करना बेहद उबाऊ कार्य लगता है ।

 रिचर्ड फेय्न्मन एक नोवेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी थे । जिन्हें महान व्याख्याता ग्रेट एक्स्प्लैनर के नाम से जाना जाता था । इन्होंने एक ऐसी तकनीक खोजी जिससे चीजों को समझा जा सकता हैं साथ ही साथ उसे याद भी किया जा सकता है। उनकी इस खोज के पीछे किसी भी जटिल विषय को सरल शब्दों में समझाने की इच्छा  के कारण हुआ।

फेय्न्मन तकनीक को स्पष्टतः जेम्स ग्लेइक्क ने वर्ष 1993 में अपनी जीवनी जीनियस – दी लाईफ एंड साइंस ऑफ रिचर्ड फेय्नमन में बताया।

इस पुस्तक में जेम्स ग्लेइक्क ने उन तरीकों की व्याख्या की जिसको अपना कर फेय्नमन प्रिन्सटन विश्वविद्यालय में अपनी परीक्षाओं अव्वल हो पाए।

फेय्न्मन ने एक कोरी पुस्तिका ली और उसका शीर्षक दिया जो मैं नहीं जानता हूँ उन बातों की पुस्तिका ।

उन्होंने अपने ज्ञान को संगठित किया ।

कई सप्ताहों तक उन्होंने भौतिकी की शाखाओं को अलग-अलग किया ।

अपने अनुसार सारी चीजों को संग्रहीत किया । उस विषय की महत्वपूर्ण चीजों को अलग एवं चिह्नित किया ।

फेय्न्मन द्वारा इस तकनीक की शुरूआत हुई।

फेय्न्मन तकनीक का उपयोग हम निम्नलिखित कार्यों में कर सकते हैः

  • उन विचारों को समझ सकते हैं जिन्हें समझने में बेहद कठिनाई होती है।
  • उन विचारों को याद रख सकते हैं जो समझ तो जाते हैं परन्तु लिखते वक्त या परीक्षा के समय भूल जाते हैं।

परीक्षा पूर्व पढ़ने के बेहद आसान एवं सटीक तरीकों में शामिल कर सकते हैं ।

कई विद्यार्थी किसी चीज को समझने में पुस्तकालयों में कई घंटे व्यतीत करते है ।

वो इस तरीके के माध्यम से 20 मिनट में न केवल जटिल से जटिल बातों को समझ पाएंगे बल्कि कालांतर तक इसे याद भी रख पाएगें।

तो अब जानते हैं कि आखिर क्या ऐसा है इस फेय्न्मन तकनीक में ?


इस तकनीक के चार स्तर हैं –

विषय का चुनाव

प्रथम स्तर पर उस विषय या शिर्षक का चुनाव करना है।

जिसको समझने में कठिनाई हो रही है या जिसे याद करने में मुश्किल हो रही है।

इस शीर्षक को पढ़ाने का प्रयास

दूसरा स्तर उस शीर्षक की व्याख्या को लिखना ।

यदि आपको इसे शीर्षक के रूप में किसी को पढ़ाना हो जिसे उसके बारे में कुछ भी पहले से न पता हो कैसे पढ़ाओगे ?

अर्थात मूल बातों को जानना।

जब मूल बातें पूर्णतः मालूम हो तभी किसी को अपनी बातें समझा पाने में सक्षम हो पाएँगें।

इससे अपने समझने के तरीकों से भी अवगत हो पाएंगे ।

दूसरों को समझाने के क्रम में क्या मुश्किलें आएँगी इससे भी परिचित हो सकेंगे ।

उससे समझने के सरल तरीकों का ईजाद कर सकेंगे उस शीर्षक पर अपनी पकड़ को जान सकेंगे।

जब किसी बात में उलझन हो तो पुनः पुस्तक को पढ़े

तीसरा स्तर जब उस शीर्षक में समझने में कठिनाई हो।

तो उस पुस्तक को या उसी शीर्षक की कोई और पुस्तक को पढ़ें ।

शिक्षक की मदद ले या पुनः पुस्तक को पढ़ते रहे जब तक खुद में यह आत्मविश्वास न आ जाए कि अब इस शीर्षक को मैं किसी कागज़ पर बिना देखे लिख सकता हूँ या इसकी व्याख्या कर सकता हूँ।

चीजों को सरलीकृत करना जटिल बातों का कम समावेश करना

चौथा स्तर अपनी अब तक की पढ़ी हुई बातों को सरल भाषा में लिखना ।

कठिन बातों को जो दुविधा प्रकट कर रहे हो या भूल जा रहे हो उसे यथासंभव सरल रूप में अपनी भाषा में लिखना ।

जिसे कोई भी आसानी से समझ सके।

इन सब के पश्चात तुम यह पाओगे कि न तुमने किताबी भाषा की जटिल बातों को अपनी सरल भाषा में बदल दिया, साथ ही साथ इसकी व्याख्या करने की क्षमता प्राप्त कर ली।

तो हो जाओ शुरू इस तकनीक का उपयोग करने को ! कोरा कागज़ लो और अपनी उस जटिल शीर्षक का चुनाव करो।

चारों स्तर का पालन करो। शुरू-शुरू में तुम्हें बीस मिनट लगेंगे परन्तु जब तुम इस तकनीक में माहिर हो जाओगे तो और कम समय में ही इसे पूरा पाओगे।

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